कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला सीधी मध्य प्रदेश

प्रेस विज्ञप्ति दिनांक 02 फरवरी, 2026

​संवेदना और तकनीक का संगम: सीधी बना मूक-बधिरों के लिए क्यूआर कोड (QR Code) आधारित साइन लैंग्वेज ट्रांसलेटर की सुविधा देने वाला अग्रणी पुलिस जिला

​इंदौर के विख्यात समाजसेवी ज्ञानेंद्र पुरोहित के मुख्य आतिथ्य में राज्य स्तरीय जिला प्रशिक्षण कार्यशाला का सफल आयोजन

दिव्यांगजनों और विशेषकर मूक-बधिर (Divyangjan/Hearing Impaired) नागरिकों के प्रति पुलिस प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्षम बनाने की दिशा में आज सीधी पुलिस ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कोरी के नेतृत्व में आयोजित इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के माध्यम से सीधी देश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसके समस्त थानों और चौकियों में मूक-बधिर फरियादियों की सहायता के लिए आधुनिक ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) प्रणाली लागू की गई है।

​तकनीक से टूटेगी संवाद की बाधा: देश की पहली अनूठी पहल
​कार्यशाला में बेंगलुरु की ‘साइनेबल कम्युनिकेशन’ (SignAble Communication) की डायरेक्टर रुपमणि छेत्री द्वारा विकसित एक विशेष क्यूआर कोड का अनावरण किया गया।
​कैसे करेगा काम: जिले के हर थाने और चौकी में यह क्यूआर कोड प्रदर्शित रहेगा।जब भी कोई मूक-बधिर फरियादी थाने आएगा, पुलिसकर्मी इस कोड को मोबाइल स्कैन करेंगे।
​लाइव ट्रांसलेटर: स्कैन करते ही वीडियो लिंक के माध्यम से बेंगलुरु स्थित प्रतिनिधि (साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर) से तत्काल संपर्क हो जाएगा, जो पुलिस और फरियादी के बीच संवाद सेतु का कार्य करेगा।
​साइन लैंग्वेज प्रशिक्षण: ज्ञानेंद्र पुरोहित का मार्गदर्शन
​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंदौर की ‘आनंद सर्विस सोसाइटी’ के संचालक श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित रहे। मंच संचालन करते हुए निरीक्षक अरुणा द्विवेदी (थाना प्रभारी कुसमी) ने श्री पुरोहित के जीवन संघर्ष और दिव्यांगजनों के उत्थान के प्रति उनके समर्पण का परिचय दिया। श्री पुरोहित और सोनांचल बधिर संघ सीधी के सदस्यों ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को साइन लैंग्वेज की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान एक लाइव डेमो के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे तकनीक के जरिए मूक-बधिरों की समस्याओं को तुरंत समझा जा सकता है।

​पुलिस अधीक्षक का प्रभावी संबोधन:
“वर्दी के पीछे एक संवेदनशील हृदय का होना अनिवार्य”
​कार्यक्रम के समापन पर पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कोरी ने भावुक और प्रभावी संबोधन देते हुए कहा:
​”अक्सर मूक-बधिर व्यक्ति थाने आने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि उनकी बात कोई समझ नहीं पाएगा। आज सीधी पुलिस ने उस डर को तकनीक और ट्रेनिंग से खत्म कर दिया है। वर्दी का असली गौरव तब है जब समाज का सबसे कमजोर और ‘मौन’ व्यक्ति भी बेझिझक अपनी बात हम तक पहुँचा सके। मैं अपने पूरे स्टाफ से अपील करता हूँ कि दिव्यांगजनों के साथ केवल एक पुलिस अधिकारी की तरह नहीं, बल्कि एक अत्यंत संवेदनशील और सहानुभूति रखने वाले साथी की तरह व्यवहार करें। यह क्यूआर कोड केवल एक स्टिकर नहीं, बल्कि न्याय के लिए हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
​प्रमुख उपस्थिति एवं आभार
​कार्यशाला में सोनांचल बधिर संघ के सचिव विपिन मिश्रा, अध्यक्ष सतीश गौतम, सदस्य धीरेंद्र और रवि सिंह ने मूक-बधिरों को समाज में आने वाली चुनौतियों और उपहास के बारे में बताकर सबको भावुक कर दिया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद श्रीवास्तव, परिविक्षाधीन उप पुलिस अधीक्षक श्री सुजीत कड़वे, रक्षित निरीक्षक श्री वीरेंद्र कुमरे सहित जिले भर के थाना/चौकी प्रभारी और स्टाफ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।
​अंत में पुलिस अधीक्षक ने श्री ज्ञानेंद्र पुरोहित का शाल-श्रीफल और मोमेंटो भेंट कर सम्मान किया। आभार प्रदर्शन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद श्रीवास्तव द्वारा किया गया।

​प्रमुख विशेषताएं:
​देश में प्रथम: सीधी के समस्त थानों में क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा।
​विशेष प्रशिक्षण: पुलिस बल को साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) का व्यवहारिक ज्ञान।
​डिजिटल सशक्तिकरण: बेंगलुरु के विशेषज्ञों से वीडियो कॉल पर तत्काल संवाद की सुविधा।

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