​– प्रेस विज्ञप्ति —

‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान का नया चरण: सीधी पुलिस ने अब जिला व स्थानीय चिकित्सालयों एवं थाना परिसरों में चलाया विशेष साइबर जागरूकता अभियान
​मरीजों, तीमारदारों, स्वास्थ्य कर्मियों और आगंतुकों को सिखाए गए डिजिटल सुरक्षा के गुर; चिकित्सा व थाना परिसरों में लगीं पुलिस चौपालें


पुलिस मुख्यालय, भोपाल के दिशा-निर्देशानुसार आम नागरिकों को डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी, ऑनलाइन अपराधों और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले खतरों से सुरक्षित रखने हेतु जिला सीधी में विशेष साइबर जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक 2.0’ को आज एक नए मोड़ पर ले जाते हुए व्यापक स्तर पर संचालित किया गया। पुलिस अधीक्षक सीधी श्री संतोष कोरी (IPS) के कुशल मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी एवं समस्त अनुभागों के पुलिस अनुविभागीय अधिकारियों (SDOP) के सीधे पर्यवेक्षण में इस अभियान के तहत आज जिले के संवेदनशील और सार्वजनिक स्थलों को केंद्रित किया गया।
​इसी तारतम्य में, साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर अंकुश लगाने और नागरिकों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के उद्देश्य से आज जिले भर के समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में मोर्चा संभाला। सीधी पुलिस द्वारा आज जिले के समस्त शासकीय व स्थानीय चिकित्सालयों (अस्पतालों) तथा सभी थाना व चौकी परिसरों में सघन जन-संवाद और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अस्पताल में आने वाले मरीजों, उनके परिजनों (तीमारदारों), स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों तथा थानों में विभिन्न कार्यों से आने वाले आगंतुकों व स्थानीय नागरिकों को डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करने की शपथ दिलाई गई तथा वित्तीय ठगी से बचाव के व्यावहारिक तरीके साझा किए गए।
​चिकित्सालयों और थाना परिसरों में जमीनी गतिविधियां 
​अभियान के तहत आज जिले की समस्त पुलिस इकाइयों द्वारा जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया:
​चिकित्सालयों में विशेष शिविर: जिले के समस्त थाना व चौकी अंतर्गत आने वाले अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष चौपालें लगाई गईं। यहाँ इलाज कराने आए ग्रामीण व शहरी नागरिकों को यह समझाया गया कि आजकल बीमारी, सहायता या एम्बुलेंस सेवा के नाम पर भी फर्जी लिंक भेजकर ठगी की जा रही है, जिससे सावधान रहने की अत्यंत आवश्यकता है।
​थाना परिसरों में जन-संवाद: सभी थाना व चौकी परिसरों में आने वाले फरियादियों और स्थानीय गणमान्य नागरिकों को एकत्रित कर व्यापारिक लेनदेन, डिजिटल पेमेंट और सोशल मीडिया सुरक्षा के संबंध में सघन रूप से जागरूक किया गया तथा सुरक्षात्मक पम्पलेट वितरित किए गए। बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं को अनचाहे कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सख्त हिदायत दी गई।
​पुलिस अधीक्षक सीधी, श्री संतोष कोरी का संदेश:
​”वर्तमान डिजिटल युग में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। साइबर अपराधी आमजन की मजबूरी या असावधानी का फायदा उठाकर उनकी गाढ़ी कमाई पर सेंध लगा देते हैं। चिकित्सालयों और थानों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक सीधी पहुँच बनाना है। ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को इतना सजग बनाना है कि वे स्वयं ही इन अपराधियों के झांसे में आने से बच सकें। सतर्कता ही हमारा सबसे बड़ा रक्षा कवच है।”
​सीधी पुलिस द्वारा जारी अनिवार्य साइबर सुरक्षा चेतावनी एवं दिशा-निर्देश:
​गोपनीयता बनाए रखें: अपने बैंक खाते का पासवर्ड, यूपीआई (UPI) पिन, क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर और सीवीवी (CVV) किसी भी परिस्थिति में किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें। बैंक कभी भी फोन पर ऐसी जानकारियां नहीं मांगता।
​ओटीपी (OTP) सुरक्षा: मोबाइल पर आने वाले किसी भी वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को किसी अन्य व्यक्ति को न बताएं, भले ही वह खुद को बैंक अधिकारी, बिजली/स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी या कूरियर बॉय क्यों न बताए।
​संदिग्ध लिंक से दूरी: व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल पर प्राप्त होने वाले अज्ञात और प्रलोभनकारी लिंक्स (जैसे- मुफ्त इलाज/सहायता, लॉटरी जीतना, पार्ट-टाइम जॉब) पर भूलकर भी क्लिक न करें। यह आपके डिवाइस को हैक कर सकते हैं।
​पार्ट-टाइम जॉब और निवेश के झांसे: टेलीग्राम या अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर घर बैठे मोटी कमाई करने वाले कतिपय टास्क-बेस्ड जॉब और अनधिकृत ऐप के जरिए निवेश के झांसे से पूरी तरह दूर रहें।
त्वरित सहायता हेतु राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर – 1930:
​यदि किसी नागरिक के साथ किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) घटित होती है, तो वे बिना समय गंवाए तत्काल भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अतिरिक्त नागरिक आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर जाकर भी अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। समय पर दी गई सूचना से ठगी गई राशि को अपराधियों के बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) कराया जाना संभव होता है।

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